हरी हरी दूब चढ़े गजानन हरे हरे
हरी हरी दूब चढ़े, गजानन हरे हरे।। मेरे गजानन के बड़े-बड़े शीश है, मेरे गजानन के बड़े-बड़े शीश है, सुंदर मुकुट सजे, गजानन हरे हरे।। मेरे गजानन के बड़े-बड़े कान…
भक्ति का अपना संसार
हरी हरी दूब चढ़े, गजानन हरे हरे।। मेरे गजानन के बड़े-बड़े शीश है, मेरे गजानन के बड़े-बड़े शीश है, सुंदर मुकुट सजे, गजानन हरे हरे।। मेरे गजानन के बड़े-बड़े कान…
फड़ लो पल्ला माता दा, दोहा – बिन मां दी किरपा जीव जगत विच, पा नहीं सकदा काया है, किस्मत वाला है जिसदे सिर ते, मां दे आंचल दी छाया…